
तुम्हारी ज़ुल्फ के साये में अभी हाल बैठा हूं,
तुम्हें जाने की जल्दी मैं मगर फ़ुर्सत में बैठा हूं ।
तेरे इक दीद के आगे भला ये मिल्कियत क्या है,
ज़मीनें छोड़कर अपनी मैं तेरे दर पे बैठा हूं ।
मेरे वजूद का अपना कोई वजूद नहीं है,
तू जो कह दे हूं
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