जितना अधिक तेरी आंखों में जल होगा,
उतना अधिक हृदय में प्रेम सबल होगा ।
कृपणता तेरी काम न आएगी जग में,
दान मोतियों का ही देख सफल होगा ।
माना मार्ग है दुष्कर, भीतर-बाहर का,
तू खोल अभी तेरी गठरी में हल होगा ।
पंछी दाना चुग जाते हैं, आंगन से,
लगता मेरे भाग में इनका फल होगा ।
जब नीति-नीयत साफ़ साफ़ न दिख पाए,
समझो दल के भाल पे कोई छल होगा ।
कहता पेड़ कली कहती कहता है 'सूरज'
आज कड़ा है फल तो मीठा कल होगा ।
सूरज प्रकाश राजवंशी
