कहीं फिर से तू न, बदल दे हिसाब,
मेरी ज़िन्दगी का तू कर दे हिसाब ।
ये दामन नहीं है, तेरा बे-हिसाब,
मगर ख़्वाहिशें तेरी, हैं बे-हिसाब ।
सिकंदर ने तो सिर्फ़ जीती थी जंग,
पोरस ने जीते थे दिल बे-हिसाब ।
नज़र को नज़र से, नहीं बैर कोई,
दिल से तो दिल का तू कर ले हिसाब ।
उठाने से पहले, किस्मत पे उंगली,
अपने करम का, तू कर ले हिसाब ।
अदावत नहीं, जब ज़माने से 'सूरज',
मुहब्बत ही क्यों न, करें बे-हिसाब ।
सूरज प्रकाश राजवंशी
