धूप बारिश अगर नहीं आती

तेरी सूरत नज़र नहीं आती ।


मौत आनी है आएगी इक दिन

दिल को राहत मगर नहीं आती ।


दिन में तेरा सुरूर रहता है

नींद भी टूटकर नहीं आती ।


बस्तियां लूटने वालों से कहो

बरकतें लूटकर नहीं आती ।


मौत रूठे तो ज़िन्दगी हंस दे

जान फिर रूठकर नहीं आती ।


आशिक़ी दिल की है ज़मींदारी

अक्ल इसमें नज़र नहीं आती ।


~सूरज प्रकाश राजवंशी