वो मुझे छोड़कर नहीं जाता,

दिल मेरा तोड़कर नहीं जाता ।


एक खोया है आदमी मुझमें,

ज़हन को छोड़कर नहीं जाता ।


देर तक वो कमाई करता है,

वक़्त पर बाप घर नहीं जाता ।


मां भी जलती है लकड़ियों की तरह

पेट सबका यूं भर नहीं जाता ।


मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले,

ये जो कह देता मर नहीं जाता ।


बूंद ख़ुद आसमां से गिरती है,

पेड़ ख़ुद दौड़कर नहीं जाता ।


मुझसे है ये वजूद दुनिया का,

क्यों ये खोने का डर नहीं जाता ।


सूरज प्रकाश राजवंशी