इश्क़ करने की ये सज़ा क्या है,
इश्क़ न हो तो फिर मज़ा क्या है ।
तूने बे-ईमान कर दिया मुझको,
अब मेरे पास में बचा क्या है ।
तुझको अहसास क्यूं नहीं होता,
मेरे दिल का तुझे पता क्या है ।
नींद आती है पर नहीं आती,
रातभर का ये रतजगा क्या है ।
प्यार करना तुझे गुनाह हुआ,
ये ग़लत है तो फिर बजा क्या है ।
चांद छत से नज़र नहीं आता,
चिमनियों तुमने ये करा क्या है ।
रोशनी का सुराग होता है,
अंधेरों का सिरा पता क्या है ।
दुश्मनों को सलाम है 'सूरज'
जान के दोस्त का दग़ा क्या है ।
सूरज प्रकाश राजवंशी


