कुछ तो थोड़ा सा कर जमा मुझको,

खर्च कर ले मगर, कमा मुझको ।


मेरा दिल भी खुला है घर भी खुला,

कभी ऐ दोस्त, आज़मा मुझको ।


तेरे वादे तो सब सियासी हैं,

सच ये बोला है दे सज़ा मुझको ।


तुझको तेरा पता जो मिल जाए,

भेज देना तेरा, पता मुझको ।


अब तो मेरे सफ़र के छालों ज़रा,

मेरी मंजिल भी दो बता मुझको ।


मौत को रोकना नहीं मुमकिन,

ज़िन्दगी तू न दे, दग़ा मुझको ।


जुगनू हो के मैं आ नहीं सकता,

मैं सूरज न यूं, बुला मुझको ।


सूरज प्रकाश राजवंशी