नज़र से नज़र को मिलाकर तो देखो
दीये दोस्ती के जलाकर तो देखो ।
उठ जाएगा आंख से हर इक पर्दा
अंधेरों से आंखें हटाकर तो देखो ।
मुहब्बत के सब दांव हमने हैं जीते
तुम भी कभी आज़माकर तो देखो ।
हो जाओगे तुम भी तरोताज़ा वाईज़
हाथों में सागर उठाकर तो देखो ।
दुश्मनों की कद्र बढ़ जाएगी सूरज
घर दोस्तों को बुलाकर तो देखो ।
सूरज प्रकाश राजवंशी


