बाप को जब कमाई देता है,

बेटा वालिद सुझाई देता है ।


जान ख़ुद को तू आईना होकर,

बेजा मुझको सफाई देता है ।


ख़ुद वो आता नज़र नहीं लेकिन

उसका जलवा दिखाई देता है ।


उसको मस्जिद में ढूंढने वाले,

वो कहां यूं दिखाई देता है ।


वो जो मंदिर में आ नहीं सकता,

देख बुत को ढलाई देता है ।


ये सियासत नहीं हक़ीक़त की,

सिर्फ किस्सा सुनाई देता है ।


चांद का दोष है बदलता है,

सूरज इक सा दिखाई देता है ।


- सूरज प्रकाश