मेरे माथे की उसे कोई शिकन अच्छी नहीं लगती
बड़ी नाज़ुक है वो पंखुड़ी सी पर कच्ची नहीं लगती,
वो हर लेती है मेरी हर थकन बस मुस्कुराहट से
वो मुझको मां नज़र आती है अब बच्ची नहीं लगती ।
सूरज प्रकाश राजवंशी


मेरे माथे की उसे कोई शिकन अच्छी नहीं लगती
बड़ी नाज़ुक है वो पंखुड़ी सी पर कच्ची नहीं लगती,
वो हर लेती है मेरी हर थकन बस मुस्कुराहट से
वो मुझको मां नज़र आती है अब बच्ची नहीं लगती ।
सूरज प्रकाश राजवंशी