डूब जाने का डर भी, पार की डगर भी है,
ऐ दिल, तेरी कश्ती तो बस मंझधार में है।
कौन सा रास्ता मंज़िल तक ले जाए,
ये धर्म-संकट अब तेरी पतवार में है।
कदम बढ़ा, जो होगा सो देखा जाएगा,
हौसला ही तो जिंदगी की सबसे बड़ी जीत है।
डूब गए तो तैरना भी आ जाएगा,
Surabhisrivastava
