माशूक की बाहों से ज्यादा जब तकिया सुकून देने लगे तब समझिए कुछ दूर तो निकल ही आए हैं। कुछ दूर चलना बाकी है। बाकी याद रखिए बिस्तर कोई माशूक या दोस्त नहीं है । क्युकी बिस्तर आज है तो कल भी होगा, बाहरी आराम न दे तो भीतरी तो जरूर देगा, सच।
माशूक की बाहों से ज्यादा जब तकिया सुकून देने लगे तब समझिए कुछ दूर तो निकल ही आए हैं। कुछ दूर चलना बाकी है। बाकी याद रखिए बिस्तर कोई माशूक या दोस्त नहीं है । क्युकी बिस्तर आज है तो कल भी होगा, बाहरी आराम न दे तो भीतरी तो जरूर देगा, सच।