ज्ञानी कहते है बिस्तर हराम है। आराम हराम है। अमूमन हर किसी की जिंदगी में वो दौर आ ही जाता है जब वो लोगो से दूर और बिस्तर के करीब आ जाता है । बिस्तर से दोस्ती में आराम है, सुकून है। बाहरी ही नही भीतरी भी। देखिए आपकी हर उम्र में दुनिया आपको अपना नया परिचय देगी। है अवस्था में दुनिया आपको कुछ नया सिखाएगी। दिन में तोड़ देगी। रात में बिस्तर मां की नजर से देखेगा और सुलाएगा कल के लिए तैयार करेगा। आपके दोस्त भी कदम कदम पर दोस्ती की परिभाषाएं बदलेंगे और आप रोए हुए से मुस्कुराएंगे और थक का बिस्तर और लेट जाएंगे। आंसू बहाएंगे , बिस्तर को बात बताएंगे और सो जायेंगे। बिस्तर आपको सुकून देगा और कल के लिए फिर तैयार करेगा।

 माशूक की बाहों से ज्यादा जब तकिया सुकून देने लगे तब समझिए कुछ दूर तो निकल ही आए हैं। कुछ दूर चलना बाकी है। बाकी याद रखिए बिस्तर कोई माशूक या दोस्त नहीं है । क्युकी बिस्तर आज है तो कल भी होगा, बाहरी आराम न दे तो भीतरी तो जरूर देगा, सच।