कामुकता's image
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दु:ख होता है , जब चीख दबानी पड़ती है

मन की अंतर ज्वाला से , अश्रु छुपानी पड़ती है

मैं क्या हूं ???

का संघर्ष अनवरत जारी जब तक रहता है,

निष्कामकता का पाठ , तभी तक याद वही तक रहता है,

उस बेचारे ने जो कि इतनी मेहनत से बागवानी थी,

सींचा था स्वेदों से, भावनाओं से

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