क्या रूप है तेरी, क्या तेरी मुस्कान

कोयल जैसी बोली, पपीहे जैसी गान

झील सी गहरी आंखे, हिरनी जैसी चाल

क्या रूप है तेरी, क्या तेरी मुस्कान


पलकें झुकें जब भी तो

लगे सोया संसार

पलकें खुलें तो जैसे

हो जाएं वार्तालाप

आंखे तुम्हारी जैसे सृष्टि का वरदान

क्या रूप है तेरी क्या तेरी मुस्कान


जुल्फें खुले जब तेरी

लगे घटा घिर आई

बालों को संवारे ऐसे

मोरनी पंख फहराए

तुझे देख करतें हैं, ईश्वर का गुणगान

क्या रूप है तेरी, क्या तेरी मुस्कान

✍️By Sunny Kumar