है सुप्त प्रह्लाद, हो रहे हिरण्यकश्यप के वार

कब तक और इंतजार, होली आए इस बार


होलिका है सवार, करती हर क्षण प्रहार

अब तो करें प्रतिकार, होली आए इस बार


धरती का विस्तार, इस पर मेरा अधिकार

टूटे ऐसा अहंकार, होली आए इस बार


किया हमने ही संहार, मच रहा हाहाकार

थमे चलती कटार, होली आए इस बार


पशु करें चीत्कार, अब तो सुनें ये पुकार

रहें ख़ुद पर रहमदार, होली आए इस बार


तंत्र न सरकार, हम ही करें ये सुधार

सबको जीने का अधिकार, होली आए इस बार


क्यों है चैन दुष्वार, मिटें दु:ख सब अपार

भरे शांति ये त्यौहार, होली आए इस बार


करके सब जन विचार, उठे नर और नार

तोड़े भ्रमों की दीवार, होली आए इस बार


मिटे अंधकार, हो रोशन विस्तार

खुलें नयन हमार, होली आए इस बार


न आयेंगे अवतार, ख़ुद को करें तैयार

है ये वक्त की पुकार, होली आए इस बार


भीतर बैठे जो विकार, उनका करे परिहार

पावन हों व्यवहार, होली आए इस बार


जाए जीवन न बेकार, पड़े काम हजार

रहे सच का आधार, होली आए इस बार


चाहे पड़े दु:ख की मार, हम न जाएँ हिम्मत हार

ऩिकलें विघ्नों के पार, होली आए इस बार


पहुँचें ज्ञान के द्वार, करें ख़ुद से दीदार

जगे सारा संसार, होली आए इस बार


उमड़े प्रह्लाद सा प्यार, हिरण्यकश्यप की हो हार

है ये होली का सार, होली आए इस बार