हर वक्त हर क्षण हर दिन में, जीना सीखो ।

अपने हीं अपने कामों में, मुस्कुराना सीखो ।।

हर कर्मों की अँगो में, हर नदियों की सँगम में ।

अपने ही अपने नजरो से, नजर मिलाना सीखो ।।


भुल जाओ तुम दुनिया, भुल जाओ तुम नीदियाँ ।

पानी की हर लहरों से, लहर मिलाना सीखो ।।

उठ जाओ तुम जाग जाओ, सोच में एकदम डुब जाओ ।

डुब कर अपने ख्वाबों में, बहना और बहाना सीखो ।।


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील