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उम्मीद और हम


"प्रातः की सुनहरी किरणों में,जब-जब भी देखूँ तो लगे,'जिन्दगी' की पुनः शुरूआत होती है,लेकिन वक्त को क्या पता,अगले ही राहों में पुनः,सूर्यास्त होती है"

प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील

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