"लक्ष्य सपने और जिन्दगी एक उभरती हुई पानी की बुलबुलों जैसी होती है जो छुने से नहीं महसूस करने से दिखती है...."
प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील


"लक्ष्य सपने और जिन्दगी एक उभरती हुई पानी की बुलबुलों जैसी होती है जो छुने से नहीं महसूस करने से दिखती है...."
प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील