"जिन्दगी बहती हुई पवित्र गँगा की वह धारा है जहाँ सूर्यास्त कि किरणें खुबसूरती और सूर्योदय की किरणें मोतियाँ बिखेरतीं हैं..."


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील