"मातृ मन्दिर की समर्पण में चाह मेरी की मैं हमेशा जलता रहुँ ,क्योंकि मुझे दीप नहीं जलाने हैं हमेशा दीप बनकर जलना है"


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील