माँ की आँचल में,पापा की गोद है ।
हर वक्त बदलने की पसीने में रँग है,
हैं जो तत्व, खुन और जल की ।
बीजों को पौधों में, देने की रूप है,
माँ की आँचल में, पापा की गोद है ।।
माँ की आँचल में,पापा की गोद है ।
धुप छाँव वर्षा की खुशबू भी अनेक है,
मुझमें देखे दुनिया सारी, उम्मीद भरी नैनन में ।
प्रातः की रोशनी में शामों की अँग है,
माँ की आँचल में पापा की गोद है ।।
==प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील


