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खुशियाँ


परिस्थितियों में खुशी की हवा चली,जैसे कीचड़ में एक पुष्प खिली....।स्वयं बनाकर अपने पथ पर,मँजिलो में कदम ये बढ़ चली....।।

प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील

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