बहती हुई पानी की धारा है, जिन्दगी ।

हर पल हर क्षण बहने की कहानी है, जिन्दगी ।।

खामोशीयों को छुपाये बैठी है ,

एक आश लगाये बैठी है ,

यादों की हर झोंको से !

मुस्कुरा रही है जिन्दगी ।।।


कुछ कहती है कुछ छुपा जाती है, जिन्दगी ।

समुद्र सी गहरी दिलों का एहसास है, जिन्दगी ।।

दो पहलू में सिमट गयीं है,

पल दो पल बदल गयी है ,

गुनगुनाती भौंरा कलियों की !

सुगन्ध बिखर रही है जिन्दगी ।।।


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील