"जिन्दगी"


टुट कर बिखर जायें,

बिखर कर निखर जायें !

जिन्दगी तु रहे सलामत ,

चाहो तो हम झुक जायें ।

एक तमन्ना भी मेरी ,

एक मुस्कान रहे तेरी !

तेरी गर गलियों में ,

सदा ही भटक जायें !!

एक एहसास भरी मुझमें ,

जरा पहचान तो जाओ !

एक हृदय भरी मुझमें ,

तेरी धड़कनो को सुन जायें।।

-सुनील