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गागर में सागर है


एक टहनी ही पतवार बनती है,एक चिंगारी ही वृहद् अंगार बनती है ।

जिसे रौंदा गया पैरों से मिट्टी समझकर,वही एक दिन बड़ी मीनार बनती है ।।

— प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील
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