लाख दल-दल हो,

फिर भी पैर जमाएँ रखना ।

हाथ खाली हो ,

फिर भी ऊपर उठाये रखना ।।

कौन कहता है की जल ,

चलनी में नहीं रूकती ।

जल से बर्फ बनने की ,

आशा तो लगाये रखना ।।


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील