भावनायें तो आसमाँ ,में प्रकट !की जाती है ।जमीं पर तो ,बहता हुआ आँसू भी !पानी नजर आता है ।।प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील
भावनायें तो आसमाँ ,में प्रकट !की जाती है ।जमीं पर तो ,बहता हुआ आँसू भी !पानी नजर आता है ।।
प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील