"वक्त के साथ-साथ,जब-जब भी मुझे थकान महसूस हुआ तब-तब मेरी बहन ने पेड़ो की ठहराव बनकर मुझे छाँव प्रदान की जिसपर सूर्य की किरणें परतें ही कहतीं हैं ये बहन की आँचल हैं जहाँ फल रूपी ईश्वर दिखा करते हैं..."।।


प्राकृतिक रचनाकार कवि-सुनील