मैं क्या हूँ तुम्हारे लिये, ये बताने का शुक्रिया,

मेरी 'औक़ात' मुझे दिखाने का शुक्रिया,

समझता रहा खुद को, 'मालिक' तुम्हारे दिल का,

'किरायेदार' हो तुम, ये बताने का शुक्रिया,

समझता रहा 'आया', तुम्हें इस दिल की,

मेरे दिल से 'खेल' जाने का तुम्हारा शुक्रिया,

कौन हो तुम, समझ ना पाया था मैं,

तुम्हारे 'यूँ', समझाने का तुम्हारा शुक्रिया,

समझता रहा 'रहबर', तुम्हें इस दिल का

बस 'ख़रीददार' हो, ये बताने का शुक्रिया,

ग़नीमत है कि तुमने ही तोड़ दिया 'अंबर',

मेरे दिल को किसी 'ग़ैर' से बचाने का शुक्रिया

 -सुनील 'अंबर'