सोचता हूँ कभी कि तुम ही ना होते,

फिर सोचता हूँ कि ये प्यार ना होता,


बन जाता आईना, ग़र सीरत के लिए भी,

तो ये जमाना इस मासूम सूरत का शिकार ना होता,


टोका था दिल ने भी कई दफ़ा मुझे,

अब फ़क़त दिल है, जिससे इंतज़ार ना होता,


न होती ये ख़ता, तो हम भी शरीफ़ थे,

यूँ नाम हमारा आशिक़ों में शुमार ना होता,


अब पछताने से क्या होगा 'अंबर',

तुम भी कितने ख़ुश होते, ग़र प्यार ना होता

     - सुनील 'अंबर'