लिखूँ तुम्हें अपना या किसी ग़ैर का लिखूँ,
तुम ही बताओ मैं क्या लिखूँ?
लिखूँ ये कि तुम मेरी नहीं हुई,
या ग़ैर भी नहीं हो, ये लिखूँ
लिखूँ ये कि तुम पास नहीं हो मेरे,
या मुझसे दूर भी नहीं हो, ये लिखूँ
लिखूँ ये कि तुम्हारी ख़ता नहीं है कोई,
या तुम बक़सूर भी नहीं हो, ये लिखूँ
तुम ही बताओ, मैं क्या लिखूँ?
तुम्हें तुम लिखूँ, या मैं लिखूँ
-सुनील 'अंबर' ( बीकानेर, राजस्थान)
