एक बात बताओ,

अगर इश्क़ है, तो जताती क्यों नहीं हो,

क्यों रखा है राज़ इसे, बताती क्यों नहीं हो,


कभी बात करना, कभी ना करना, ये क्या है?

अगर मोहब्बत है, तो हद से गुजर जाती क्यों नहीं हो,


कभी हँसती हो, कभी रोती हो, ये क्या है ?

तुम पहले की तरह, अब शर्माती क्यों नहीं हो?


कभी मेरी, कभी किसी और की, ये क्या है?

अब तुम एक जगह टिक पाती क्यों नहीं हो?


कभी हाँ कहती हो, कभी ना, ये क्या है?

तुम साफ-साफ समझाती क्यों नहीं हो ?


कभी तोड़ रही हो, कभी जोड़ रही हो, ये क्या है?

तुम एक ही झटके में, मुझे मिटाती क्यों नहीं हो ?

एक बात बताओ,

अगर इश्क़ है, तो जताती क्यों नहीं हो ?

 - सुनील 'अंबर'