मैं चला ही जाऊँगा
याद में रह जाऊँगा
समय की शिला पर
लकीर थोड़ी गहरी है
खुशी जरा ठहरी है
रंज की गठरी है
सब साथ मैं ले जाऊँगा
बस छाप छोड़ जाऊँगा
जाते-जाते कुछ रंग
सपनों में भर जाता हूँ
बीसी से इक्कीसी
उम्मीदें भिजवाता हूँ
थोड़ी दिल में रख लेना
बाकी दुनिया को देना

