देखता हूं कभी कभी जंगलियों के जीवन को
ना ही कोई डर और बेफिक्री के नींदों को
ऐसे ही जीवन का मैं भी एक अभिलाषी हूं
मैं बनना चाहता सन्यासी हूं। ।। 1 ।।
जहां लोगों तथा अन्य विचारों से दूर रहूंगा
जहां प्रकृति और परमात्मा में रिक्त रहूंगा
ऐसे ही जीवन का मैं भी एक अभिलाषी हूं
मैं बनना चाहता सन्यासी हूं। ।। 2।।
जिससे मिलती मुक्ति है
नही मिलती सक्ती है
मन को मिलती शांति है
नही उठती क्रांति है
ऐसे ही जीवन मैं का भी एक अभिलाषी हूं
मैं बनना चाहता सन्यासी हूं। ।। 3 ।।
।। शिवम तिवारी।।

