हम बिछड़े नहीं है, खो गए है |

मगर

दुनिया के बीचों बीच दुनिया से परे 

अपने अंदाज़ में मिलते है ।


देखे हुए तो अरसा हुआ,

मगर

ख़्वाब में मिलते है ।


उनकी तारीफें, चहलकदमी

अब खुले आम गवारा कहाँ,


उनके जितने ज़िक्र है,

मेरे राज़ में मिलते है ।