। ये दृश्य कोई आम नहीं ।
पथ पे जमघट है , पाथिको की पिड है
ये दृश्य कोई आम नहीं , ये मजबूरो की भीड़ है
ये दर्द की परिसीमा है , जो सहते है वो वीर है
पथ पर कांटे बोहत् है , ये प्रगती में गतिशील है
ये मजबुर नहीं मजदूर है , अपने जनपथ के लिए अधीर है
ये दृश्य कोई आम नहीं , ये मजबुरो की भीड़ है ।


