ये चमन , इसका हर गुल, हर काँटा
ये सारा गुलिस्ताँ आबाद रहे ,

शक शुबा फैलाने वाले रहें ना रहें
हिम्मत वालों की बड़ती तादाद रहे ,

जो बीमारी, गफ़लत, मौत का करें कारोबार
ख़ुदा, उनका जहां हमेशा बर्बाद रहे

ये तूफ़ान भी ढल जाएगा, यकीनन
ग़र हम ज़्यादा अक़्लमंदों से आज़ाद रहे,

अजीब लोग हैं हम, बार बार उठने की आदत
मुस्तकबिल में भी हमारी बुनियाद रहे ,

ज़िंदादिली हमारी फ़ितरत है, देखो
कैसी मुश्किलों में भी मिलजुल आबाद रहे ,

ये चमन में गरीब, मज़लूम को मिले हिस्सा
नए रंग में ये सारा गुलिस्ताँ आबाद रहे ..