दूर से जैसे भी दिखते हों, उनकी हक़ीक़त हम जानते हैं ,
कई आला हस्तियों की असलियत हम जानते हैं

बेवफ़ा न होगा मगर वो फिर मुझे धोखा देगा,
यकीनन, उसकी कैफ़ियत हम जानते हैं

जो बग़ैर हक़ और शक करे उल्फ़त अदा
ऐसी भी एक आध शकसियत हम जानते हैं

आरज़ू ही रही मिट जाने की उसकी बाहों में,
दुशवारियाँ ऐ वक़्त और मोहब्बत हम जानते हैं

हमारी मय्यसर शान ए शौक़त पे न जाना,
इंतेज़ार, मायूसी और ग़ुरबत हम जानते हैं

बेक़सूर थीं सीता मैय्या और रानी द्रौपदी दोनों,
उनकी तरह उठाना तोहमत हम जानते हैं

रिवाजों में खूबसूरत चलन सदियों के मगर
कई दस्तूर से ज़रूरी है बग़ावत हम जानते हैं

कुछ भी साफ़ सुथरा नहीं, मत लड़ो इतना
मटमैले हैं सारे रंग ए सियासत हम जानते हैं

हिम्मत रखो, मुश्किल दौर भी कट जाएगा
वालदेन और ख़ुदा की रहमत हम जानते हैं ..

~ सुमिता