जब तौल में घपला है, तो लाज़िम
की हर सौदा अनाप शनाप होगा,
ख़्वाबों की टोकरी उठाए जो आ गए,
बिन आका कोई जौहर क्या आफ़ताब होगा,
मगर अब, चापलूसी पे भरोसा ना करना
झूठ की हर दलील का खरा जवाब होगा ,
मुमकिन दबदबे की आदत छोड़नी पड़ेगी,
मेहनत कशों का भी कभी रुआब होगा ,
जिनके हज़ार सलाम भी ना क़ुबूल थे,
उन्ही से झुक कर तुम्हारा आदाब होगा ,
इतने सयाने जो बनते हो, हुनर को
रेज़गारी समझना तुम्हारा अज़ाब होगा ,
ग़र है इतनी ताक़त ,ख़ुदा ख़ैर, ज़रा
इंसानियत से तुम्हारा क्या ख़राब होगा,
जिनको मोहताज की बेबसी न दिखी ,
उन सब का भी जल्द हिसाब होगा,
वक्त की चक्की में पिस रहें हैं करम
हुज़ूर, यहीं दोनों सज़ा और सवाब होगा ..
~ सुमिता

