एक मशवरा

उसने कभी हमें ना न कहा
हमने भी कभी आसानी से हाँ न कहा ,
अगर और मगर पे घिसी कुछ स्याही
भाँपने को चाहत की गहराई ,
नौकरशाह या हसीन से इश्क़ ग़र करना
दोस्तों, पैरवी अपनी बुलंद रखना ...