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पत्थर


पत्थर भी पिघलता है अपनी एक हद के पार आ कर,बेसर्म लोगो ने बेशर्मी को ही अपनी ढाल बना डाला

आखिर तैर कर वो जरा आए तो सही खुदगर्जी के पारहम ने तो अंधा विश्वास करने का मिशाल तक बना डाला।

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