तुम से लिपट कर ये तमाम
जमाने के गम गलत कर लेता,
तू जो रहे मेरी जहाँ मे,
माँ! मै सब दुख सहन कर लेता,
माँ तुम जो मेरा आसमान होती
इन सितारों को भी अपनी गजल कर लेता
माँ!!तुम से लिपट कर ये तमाम
जमाने के गम गलत कर लेता,
कहाँ सकुन मिलता है तेरा बिना
बेसक एक पहाड़ चाँदी का कमा लेता,
अगर मिलती ममता किसी मोल पर
माँ! मै सौदा भी प्राण पर कर लेता
घर मे तुम बिन एक पल आराम नही
माँ ! मै जिंदगी मे ठहराव कहाँ से लाता
माँ!! तुम से लिपट कर ये तमाम
जमाने के
गम गलत कर लेता,

