बहुत अच्छा बने हम दुसरो के लिए

सोचा अब बुरा बन जाए खुद के लिए


बहुत मौके दिए है मैंने हर बार ये सोचकर

क्या पता वो लौट आए एक दिन सिर्फ मेरे लिए


वो बात और है कि हमने किसी और को चाहा नही

वरना बाजार खुला है हर गली मे आवारगी के लिए


इश्क है तुमसे और तुम्हारे रूह से इस कदर अब

कि ये लम्हे भी कम हैं इस जन्म आशिकी के लिए