ना जाने शहर बेच
लोगो को केसे नींद आ जा रही है.....
जल रहा है ये प्यारा सा हिंदुस्तान मेरा
इसे बचाने की लाख कोशिशें
यहां की जा रही है
तड़प रही है धरती
भूखे बिलख रहे है लोग
शहर की हालत मेरे यहां बिगड़ती जा रही है
देखा है उस औरत को भी मेने अश्क भरी आंखों से अपनी
जो अपने सुहाग को अकेली ही शमसान ले जा रही है
रो रहे है लोग घुट घुट कर यहां
गले मिल अपनों से भी ना वो रो पा रहे है
ना जाने शहर बेच
लोगो को केसे नींद आ जा रही है...…
जिस बाप ने कमाया था अनमोल वक्त
उस अनमोल वक्त को लोग चंद रुपयों में बेचने जा रहे है
मजबूर है लोग
खुद को गिरवी रखने को
फिर भी इंसान इंसान को ना बचा पा रहे है
बर्बाद हो चुका है यहां शहर मेरा.
बर्बाद हो चुका है यहां शहर मेरा,
एक दिया तक ना लोग घरों में जला पा रहे है
जल रहा है प्यारा सा हिंदुस्तान मेरा
ना जाने लोग केसे चुप चाप घरों में अपने सो रहे है
काप उठी रूह मेरी वो मंजर देख कर
काप उठी रूह मेरी वो मंजर देख कर
जहां अपने ही अपने को तड़पता देखते जा रहे है
नही है हाथ में कुछ उनके
बस अपनी आंखो से अश्क वो बहाते जा रहे है
मजबूर है लोग यहां मौत का खेल देख कर
अपने को ही अपने नही यहां बचा पा रहे है
जिधर भी देखी उधर ही लोगो की आंखे
भीगती मुझे नजर आ रही है
मायूस सा हो गया है ये प्यारा सा हिंदुस्तान मेरा
ना जाने शहर बेच
लोगो को केसे नींद आ जा रही है.....
जाहिलता तो देखो चंद लोगों की शहर में मेरे
इंसान को इंसानियत के लिए ही यहां ठगा जा रहा है
संभल जाओ भाईयो मेरे
खुद का रखो खयाल
क्युकी वायरस के नाम तीसरा चरण सुरु होने जा रहा है
घुस चुकी है शहर में मेरे ऐसी बीमारी
घुस चुकी है शहर में मेरे ऐसी बीमारी
जिसकी अंतिम तिथि ना कोई बता पा रहा है
फैल रहा है हवा से हवा के मुताबिक वो वायरस
वो सिर्फ और सिर्फ इंसान को ही निशाना बना रहा है
जल रहा है प्यारा सा हिंदुस्तान मेरा
इंसान को बचाने की कोशिश यहां लाखो में की जा रही है
ना जाने शहर बेच
लोगो को केसे नींद आ जा रही है .....
ना जाने शहर बेच
लोगो को केसे नींद आ जा रही है .....


