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मैं समझता हूं।


तुम्हारी बेबसी को, मैं समझता हूं,तुम्हारी कही हर एक जुबानी को, मैं समझता हूं,

यूंही बीच राह ठुकराना तुम्हारा,फिर आंखों में नमी-चेहरे पर मुस्कुराना तुम्हारा,मैं समझता हूं।

— सुमित कुमार
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