उसकी यादें जब भी आए तो,कहीं खोने लग जाऊ मैं।जज्बातें जब सहा ना जाए तो,शब्दों में उसे पिरोनें लग जाऊ मैं।मुद्दतों के इंतजार ने खोखला बना दिया हैं मुझे,वो जब कभी सामने आजाए तो,फुट कर रोने लग जाऊ मैं।