सीने में हैं ध्रकती आसमां,

तो चांद-तारों की समावत भी किया करों।

दिल में हैं गर सच्ची मोहब्बत,

तो दुनिया से बगावत भी किया करों।

दूर से देखा और चला गया,

अब तो टूटे घरों की मरम्मत भी किया करों।

पाप करों और बच्च जाओ यहां,

यारों, इसके लिए थोङी जियारत भी किया करों।


~सुमित कुमार