सागर में डूबती नाव जैसा हूं,

आ खुद से लपेट लें मुझे।

टूटते मोटी जैसा बिखरा हूं,

आ खुद से समेट लें मुझे।

बाहे फैलाएं आज भी खड़ा हूं,

आ खुद से भेंट लें मुझे।


*भेंट - गले लगाना*


~सुमित कुमार