सूखे समुंदरों में हम, लहरों को कहा देखें,

अंदर उजड़े गावों में हम, बाहर शहरों को कहा देखें।

सबों का तय हैं ये सफ़र जिंदगी का,

इन सफरों में हम, हमसफ़रों को कहा देखें।


~सुमित कुमार