ए वक्त तुम भी ज़रा ठहर जाते,

जो ज़ख्म दिया उसे तो भर जाते,

ए वक्त तुम भी ज़रा ठहर जाते।

जो आजादी तुमने दिया,

उसकी बरवादी तो देखते जाते,

ए वक्त तुम भी ज़रा ठहर जाते।

मेरी नजाकत को थोड़ा तो समझते,

जो मोहब्बत मैंने किया उसकी हिफाज़त तो करते,

ए वक्त तुम भी ज़रा ठहर जाते।

यू ही बीच रास्ते मुह मोर-जानें का क्या ही मतलब,

इससे बेहतर तुम हमें अपने कब्र तो छोर जाते,

ए वक्त,तुम भी ज़रा ठहर जाते।


~सुमित कुमार